Cultivation of Jojoba : ऐसी तिलहनी फसल, जिसकी विदेशों में मांग है, 150 साल तक देगी मुनाफा

Cultivation of Jojoba : मूंगफली, सरसों, सरसों, सूरजमुखी और तिल आदि तिलहनी फसलों के बारे में आप जानते ही हैं जिनसे तेल निकाला जाता है। लेकिन क्या आपने जोजोबा (Jojoba) का नाम सुना है। नहीं तो अब जान लीजिए कि जोजोबा विदेशी तिलहनी फसल है, उसमें से भी तेल निकलता है।

विदेशों में इसके तेल की काफी मांग है। इसलिए इसकी खेती भी लाभदायक है। जोजोबा की खेती (Cultivation of Jojoba) देश के अलग-अलग हिस्सों में की जा रही है।

खेती के लिए अच्छी भूमि, अधिक पानी, उर्वरक, कीटनाशक और संरक्षण की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल, कम लागत और उच्च उत्पादन वाली खेती है।

जोजोबा की खेती देश की कृषि में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। आइए जानते हैं जोजोबा की खेती के बारे में

जोजोबा के फायदे

जोजोबा तेल गंधहीन और अच्छी गुणवत्ता वाला होता है। इसके तेल में नमी की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए कॉस्मेटिक कंपनियों की यह पहली पसंद होती है।

इसका तेल रासायनिक संगठन सीबम के समान है, जो एक तैलीय पदार्थ है जो मनुष्यों की त्वचा से निकलता है, इसके तेल का उपयोग बालों और त्वचा पर किया जा सकता है। यह बालों और त्वचा पर औषधि के रूप में काम करता है।

जोजोबा का क्वथनांक बहुत अधिक होता है, इसलिए इसे ईंधन के रूप में जलाने से अधिक ऊर्जा पैदा होती है और सल्फर बहुत कम, तभी यह पर्यावरण रक्षक भी है।

जोजोबा की उत्पत्ति और क्षेत्र

जोजोबा रेगिस्तानी और विदेशी मूल का पौधा है। इसका अंग्रेजी नाम जोजोबा है, जिसे हिंदी में होहोबा कहा जाता है। जोजोबा का वैज्ञानिक नाम सायमांडेसिया चिनेंसिस होहोबा है।

यह मूल रूप से एक रेगिस्तानी पौधा है। दुनिया में जोजोबा मुख्य रूप से मैक्सिको, कैलिफोर्निया और एरिजोना के सोनारन रेगिस्तान में उगाया जाता है। इसके साथ ही इजराइल, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया और कुछ अफ्रीकी देशों में भी इसकी खेती की जाती है।

राजस्थान सरकार बढ़ावा दे रही है

भारत में जोजोबा की खेती मुख्य रूप से राजस्थान में की जाती है। भारतीय राज्य राजस्थान राजस्व अधिनियम, 1955 के अन्तर्गत खेती को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार से पट्टे पर बंजर भूमि का आवंटन प्राप्त करने का प्रावधान है।

राजस्थान में इसकी खेती को विकसित करने के लिए इजराइली वैज्ञानिकों की मदद से दो फार्म विकसित किए गए हैं। जिनमें से एक फतेहपुर सीकरी और दूसरा ढांड जयपुर में स्थित है।

जोजोबा के लिए जलवायु और भूमि

जोजोबा के पौधे माइनस 2-55 डिग्री का न्यूनतम तापमान सहन कर लेते हैं, इसे हर जगह उगाया जा सकता है, इसके पौधे को 300 मिमी बारिश की जरूरत होती है, लेकिन यह 125 मिमी बारिश वाले क्षेत्रों में अच्छी तरह से बढ़ता है।

कोहरे और धुंध से इसके पौधों को नुकसान पहुंचता है। उत्पादन में भी कम खपत होती है। खेती के लिए रेतीली, अच्छी जलनिकासी वाली, अम्ल-मुक्त भूमि की आवश्यकता होती है। मिट्टी का ph मान 7.3-8.3 के बीच होना चाहिए।

जोजोबा रोपण

रोपण के लिए, बीज से पहले नर्सरी तैयार करें या आप सीधे खेत में बीज उगा सकते हैं। पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए पौधे से पौधे की दूरी 2 मीटर और कतार से कतार की दूरी 4 मीटर रखने की सलाह दी जाती है।

जोजोबा की सिंचाई और खाद

जोजोबा की खेती में ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। लेकिन पौधे लगाने के बाद सिंचाई करनी चाहिए, उसके बाद सिंचाई तब तक करनी पड़ती है जब तक कि पौधे की जड़ें न लगें, दो साल में पौधे की जड़ें गहरी हो जाती हैं।

उसके बाद शुरू में सिंचाई की आवश्यकता नगण्य होती है। यदि ड्रिप सिस्टम का प्रयोग किया जाए तो पौधों का विकास अच्छा होता है।

जोजोबा के पौधों को किसी विशेष उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए थोड़ी मात्रा में खाद और उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है।

जोजोबा उपज

जोजोबा का पौधा 3-4 साल में फल देना शुरू कर देता है, लेकिन शुरू में इसका पौधा कम फल देता है, लेकिन जब पौधा वयस्क हो जाता है तो प्रति हेक्टेयर औसतन 10 से 13 क्विंटल बीज उपलब्ध होते हैं।

इनके बीजों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। वर्तमान में इनका बाजार भाव करीब 30 से 35 हजार रुपए प्रति क्विंटल है।

Read More

Leave a Comment