Cultivation of Supari | सरकार ने ‘सुपारी’ की खेती के लिए जारी की 10 करोड़ रुपये की सब्सिडी

Cultivation of Supari : केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किसानों को कई प्रकार की फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए किसानों को सरकार की ओर से सब्सिडी यानी अनुदान दिया जाता है।

कई बार किसानों की फसल में नुकसान भी हो जाता है। इसके लिए सरकार की ओर से सहायता भी दी जाती है। वर्तमान में, कर्नाटक में सुपारी की फसल कीटों द्वारा क्षतिग्रस्त हो गई है।

कई किसानों की पूरी फसल बर्बाद होने की कगार पर है। इसी को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने किसानों की मदद के लिए एक बेहद अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सुपारी किसानों को कीट प्रबंधन के लिए 10 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की है। इससे लाखों किसानों को राहत मिलेगी।

कर्नाटक में सुपारी की फसल पर कीट का प्रकोप

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कर्नाटक के मलनाड में सुपारी की फसल पर कीड़ों का प्रकोप हुआ है. इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में राज्य सरकार ने किसानों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।

राज्य सरकार ने सुपारी की फसल को कीटों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए रणनीति तैयार की है। इसके तहत राज्य सरकार किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए अपने स्तर पर हर संभव प्रयास करेगी।

सुपारी किसानों को 10 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी

कर्नाटक सरकार ने सुपारी की फसल को कीटों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए 10 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की है।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार संयुक्त रूप से कीट हमले के कारणों की जांच कर रहे हैं।

सुपारी की फसल को कीटों से बचाने का कारगर उपाय खोजने के बाद तत्काल प्रभाव से कार्रवाई शुरू की जाएगी।

अभी किसानों को त्वरित सहायता के रूप में 10 करोड़ रुपये दिए गए हैं, ताकि किसान अपनी फसलों को कीटों से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव कर सकें.

फसल नुकसान का मुआवजा दोगुना 

सुपारी उत्पादक राज्यों में कर्नाटक का प्रमुख स्थान है। राज्य में सुपारी का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है। लेकिन इस बार सुपारी की फसल में कीड़ों का प्रकोप बढ़ रहा है।

इस बार सुपारी की फसल पर नया कीट देखने को मिला है, जो फसल को पूरी तरह बर्बाद कर रहा है। इसे रोकने का कोई उपाय अब तक नहीं खोजा जा सका है। ऐसे में संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार द्वारा किसानों की मदद की जा रही है।

राज्य सरकार ने किसानों की इस समस्या को देखते हुए प्राकृतिक आपदा के कारण फसल पर दी जाने वाली सब्सिडी को दोगुना कर दिया है। इसके लिए सरकार की ओर से 99 करोड़ रुपए पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

इसके अलावा सरकार ने अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं. जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद सब्सिडी का भुगतान किया जाएगा।

किस कीट के हमले से फसल को नुकसान हो रहा है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल सुपारी की फसल में नया कीट देखा गया है, जो सुपारी की फसल को बर्बाद कर रहा है, बताया जा रहा है कि वैज्ञानिकों ने सुपारी को नुकसान पहुंचाने वाले एक नए कीट की पहचान की है।

इसकी पहचान आईसीएआर-सेंट्रल प्लांटेशन क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीसीआरआई) केरल, दक्षिण कन्नड़, कर्नाटक के क्षेत्रीय स्टेशन के वैज्ञानिकों द्वारा की गई है।

डॉ. शिवाजी हौसराव थुबे, वैज्ञानिक, सीपीआरआई के अनुसार, कीट और रोग निगरानी के दौरान सुलिया तालुका के मरकंजा और कदबा तालुका के कनिरू गांव में सुपारी के पौधों में एशियन एम्ब्रोसिया बीटल (Asian ambrosia beetl) जिसका वैज्ञानिक नाम जाइलोसैंड्रस क्रैसिअसकुलस (Xylosandrus Crassiusculus) देखा है।

यह कीट केवल तनों को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन सुपारी के फलों में पहली बार देखा गया है। यह कीट फलों को खराब कर देते हैं। इस कीट से फलों में फंगल इंफेक्शन हो जाता है। सुपारी के भंडारण से फल अंदर सड़ जाएंगे जिससे उन्हें भारी नुकसान होगा।

सुपारी की खेती कहाँ होती है

सीपीसीआई के आंकड़ों के मुताबिक करीब 925 हजार हेक्टेयर खेती से दुनिया में 127 हजार टन सुपारी का उत्पादन होता है। भारत दोनों क्षेत्रों (49%) और उत्पादन (50%) में पहले स्थान पर है। इसके अलावा इंडोनेशिया, चीन, म्यांमार, बांग्लादेश में सुपारी की खेती की जाती है।

भारत में सुपारी की खेती सर्वाधिक कर्नाटक में होती है। यहां प्रति वर्ष 358.8 टन सुपारी का उत्पादन होता है। इसके बाद दूसरे नंबर पर केरल आता है, जहां 118.2 टन सुपारी का उत्पादन होता है।

इसके बाद तीसरे नंबर पर असम है। यहां 72.6 टन सुपारी का उत्पादन होता है। अनुमान है कि 2050 तक सुपारी की मांग 1214,000 टन तक पहुंच जाएगी।

एक एकड़ में सुपारी के कितने पौधे लगा सकते हैं

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सुपारी की मांग काफी अधिक है। अन्य देशों की तुलना में भारत में सुपारी की खेती सबसे ज्यादा होती है।

इसके बावजूद इसका उत्पादन अभी भी मांग से कम है। इसे देखते हुए देश में इसकी खेती के रकबे को बढ़ाने की जरूरत है। वर्तमान में एक एकड़ में सुपारी के 600 पौधे ही लगाए जा सकते हैं।

क्यों जरूरी है सुपारी की खेती/सुपारी का उपयोग 

सेंट्रल प्लांटेशन क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश दक्षिण एशियाई देशों में सुपारी एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है।

एशिया के कई हिस्सों में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से चबाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग पान के साथ, पान मसाला बनाने, गुटखा बनाने आदि में किया जाता है।

इसके अलावा, सुपारी का उपयोग आयुर्वेद और चीनी चिकित्सा पद्धतियों में औषधि के रूप में भी किया जाता है।

भारत दुनिया में सुपारी के क्षेत्र और उत्पादन में पहले स्थान पर है, जिसमें 16 मिलियन से अधिक लोग अपनी आजीविका के लिए सुपारी उद्योग पर निर्भर हैं।

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