How To Animal Housing Management | पशु आवास प्रबंधन कैसे करें? यहां जानें 10 टिप्स

How To Animal Housing Management : डेयरी फार्मिंग कृषि क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुग्ध उत्पादन में हमारा देश विश्व में प्रथम स्थान पर है। लेकिन प्रति व्यक्ति उत्पादकता के मामले में यह बहुत पीछे है। इसका मुख्य कारण हमारे देश में दुग्ध उत्पादन की पारंपरिक तकनीक है।

अधिकांश पशुपालकों के मन में यह सवाल होता है कि डेयरी फार्म कैसे शुरू करें? पशुओ का आवास प्रबंधन कैसे करे? पशुओ का आवास प्रबंधन कैसे होना चाहिये?

किसान मित्रो, आप ये समझ ले हमे अब आधुनिक तकनीक अपनानी है,  हम दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए हमें नई तकनीक नहीं अपनाते तो ये कभी फायदे का बिजनेस नही होगा।

जी हां, आपने सही पढा, ये एक फायदेमंद बिजनेस है और हमे इसे आधुनिक करना होगा, जिससे हम दूध उत्पादन को और बढ़ा सकें और पैसें कमा सके।

डेयरी फार्म में हमें कई पहलुओं पर ध्यान देना होता है। डेअरी फार्म का अहम हिस्सा हमारे पशु होते है, और उनका आवास और आवास का प्रबंधन बेहद जरूरी है।

Animal Housing Management

पशु आवास प्रबंधन कैसे करें?

सही स्थान चुनें : डेयरी फार्म खोलने के लिए ऐसी जगह चुनें, जो किसी शहर या कस्बे के करीब हो। इससे आपको दो फायदे होंगे। सबसे पहले, आपको बड़ी संख्या में ग्राहक मिलेंगे। दूसरा, आपको गांवों की तुलना में बेहतर दाम मिलेंगे।

डेयरी फार्म को ऊंचा रखें

डेयरी फार्म बनाते समय ऊंचाई का विशेष ध्यान रखें। पशुओं को रखने के लिए आप जो आवास या स्थान तैयार करेंगे वह आसपास के क्षेत्र से ऊंचा होना चाहिए। इससे आपको कई फायदे मिलेंगे।

पहला, बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या नहीं होगी। दूसरा, जानवरों का मल सीधे नालियों में बहेगा। तीसरा, सफाई में परेशानी नहीं होगी।

धूप का ध्यान रखें

पशुओं के लिए ऐसा आवास बनाएं, जहां धूप अच्छी तरह पड़ती हो। इसके लिए आपको सही दिशा भी चुननी होगी। अगर आप सही दिशा चुनते है, तो आपके काफी फायदे होंगे और खर्चे बचेंगे।

खेत की चौड़ाई वाला भाग उत्तर-दक्षिण दिशा में तथा लम्बाई वाला भाग पूर्व-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। इससे यह भी फायदा होगा कि पशु आवास में नमी नहीं होगी, चबूतरे सूखे रहेंगे और नाले से बदबू नहीं आएगी।

हवा और धूप अच्छी होनी चाहिए

पशु आवास के निर्माण के दौरान वेंटिलेशन का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। जानवरों के आवास पूरी तरह से बंद नहीं होने चाहिए, नहीं तो उनका जीना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगी।

कनेक्टिविटी

डेयरी व्यवसाय में कनेक्टिविटी एक महत्वपूर्ण पहलू है। इसलिए ऐसी जगह पर डेयरी फार्म बनाएं, जो सड़क से ज्यादा दूर न हो। साथ ही वहां आवागमन के पूरे साधन भी मौजूद होने चाहिए।

सड़क से 100 से 200 मीटर की दूरी सही रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जानवरों का आवास सड़क से सटा नहीं होना चाहिए, क्योंकि कई बार वाहनों की आवाज और हॉर्न से जानवर विचलित हो जाते हैं। इसलिए एक निश्चित दूरी जरूरी है।

बिजली और पानी की व्यवस्था

यह डेयरी फार्मिंग की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक है। पशुओं के उचित रखरखाव के लिए बिजली बहुत जरूरी है। बिजली की मदद से रात में रोशनी की व्यवस्था की जा सकती है।

गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए पंखे या कूलर आदि भी चलाए जा सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि जानवर इंसानों की तुलना में बहुत अधिक पानी पीते हैं।

इसलिए उन्हें पीने के लिए हर समय-समय पर पानी उपलब्ध होना चाहिए। इसके अलावा आवास की सफाई के लिए भी पानी की जरूरत पड़ेगी।

आहार की व्यवस्था

दुधारू पशुओं के आहार का विशेष ध्यान रखना होता है। इसलिए ऐसा स्थान चुनें जहां हरा चारा उपलब्ध हो। इसके अलावा अनाज, पानी और भूसे आदि की भी पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। यदि आवश्यक हो तो पशुओं को पूरक आहार भी दिया जाता है, ताकि उनमें पोषक तत्वों की कमी न हो।

बाजार और श्रम

ये दोनों चीजें इस बिजनेस के अहम पहलू हैं। डेयरी फार्मिंग से आप दूध, पनीर और खोया जैसे उत्पाद प्राप्त कर सकेंगे। लेकिन, अगर वे सही तरीके से बाजार में नहीं पहुंच पाए तो नुकसान की संभावना बढ़ जाएगी।

इसलिए आवास एक ऐसा स्थान होना चाहिए जहां से आप अपने उत्पादों की मार्केटिंग कर सकें और उन्हें समय पर बाजार में पहुंचा सकें।

साथ ही खेत और पशुओं की देखभाल के लिए, दूध निकालने के लिए, सफाई के लिए आपको श्रम की आवश्यकता होगी। इसलिए इस पहलू को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।

भंडारण की व्यवस्था करें

जानवरों के आवास में भंडारण व्यवस्था (storage System) की भी आवश्यकता होती है। इस तरह आप पशुओं का चारा, भूसी, अनाज और दूध देने के बर्तन आदि को स्टोर कर सकते हैं। इसके अलावा अगर इस व्यवसाय से संबंधित कोई अन्य वस्तु है तो उसे रखने की जगह भी मिल जाती है।

उपयुक्त पर्यावरण 

डेयरी फार्मिंग के लिए एक अच्छा वातावरण होना एक अनिवार्य आवश्यकता है। जानवर जितना साफ-सुथरा रहेगा, उसके लिए उतना ही अच्छा रहेगा।

प्रदूषित वातावरण जानवरों को बीमार कर सकता है। साथ ही इससे उत्पादकता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि एक अच्छा और सुरक्षित वातावरण का चुनाव किया जाए।

आवास व्यवस्था पर एक नजर

आप पशुओं को रखने के लिए तीन प्रकार के आवासों के बारे में सोच सकते हैं। आपको जो उचित लगे उसका निर्माण कर सकते है, लेकीन ऐसा करने से पहले नफा नुकसान और दुरगामी परिणामो के बारे में जरूर सोचे।

बंद आवास

इस प्रकार के आवास में पशुओं को बांध कर रखा जाता है। साथ ही वहां उनके खाने-पीने का भी इंतजाम किया जाता है। इसके अलावा पशुओं का दूध भी यहीं निकाला जाता है। वहीं, पशुओं को बहुत कम समय के लिए चरने के लिए छोड़ दिया जाता है।

बंद आवास के लाभ 

  1. जानवरों को खिलाना आसान है।
  2. वे एक दूसरे पर ढेर नहीं हो सकते।
  3. गंदगी भी एक सीमित क्षेत्र में ही रहती है।

बंद आवास के नुकसान 

  1. जानवर पूरी तरह आज़ाद नहीं रह सकते।
  2. आवास का निर्माण थोड़ा खर्चीला है।
  3. जानवरों की संख्या बढ़ने पर दिक्कतें आती हैं।

खुला आवास

इसके तहत एक निश्चित घेरे में बाड़ बना दी जाती है और जानवरों को खुला छोड़ दिया जाता है। उस बाड़े में ही पशुओं के खाने-पीने की व्यवस्था की जाती है।

खुला आवास के लाभ 

  • जानवर अधिक आराम से रहते हैं।
  • उन्हें प्राकृतिक वातावरण का अनुभव होता है।
  • घर बनाने का खर्चा कम होता है।

खुला आवास के नुकसान

  • पशुओं के आवास के लिए अधिक जगह की आवश्यकता होती है।
  • उन्हें अलग-अलग आहार और पानी देने में कुछ कठिनाइयाँ होती हैं।
  • बेजुबान जानवरों को संभालना मुश्किल हो जाता है।

अर्ध खुला घर

इसके तहत जानवरों को एक निश्चित समय के लिए ही बांधकर रखा जाता है। दूध पिलाने और दूध पिलाने के दौरान उन्हें बांध दिया जाता है और बाकी समय उन्हें खुला छोड़ दिया जाता है।

अर्ध खुला घर के लाभ

  • जानवर अधिक स्वतंत्रता के साथ रह सकते हैं।
  • वे बहुत आक्रामक व्यवहार नहीं करते।

अर्ध खुला घर के नुकसान 

  • कई बार बेजुबान जानवरों को संभालना मुश्किल हो जाता है।
  • बेजुबान जानवर कई बार भटक जाते है, कई बार उनका आहार पुरा नही होता।
  • इसमे खर्चा काफी कम आता है, लेकीन उत्पाद पे असर होता है।

पशुपालन में ध्यान देने योग्य बातें

आवास को तीन भागों में बांटना चाहिए। एक स्थान पर पशु रखना चाहिए, दूसरे स्थान पर दूध निकालना चाहिए और तीसरा स्थान चारा-पानी, भूसा और दूध देने के बर्तन आदि रखने के लिए निश्चित करना चाहिए।

  • बीमार पशुओं को अलग स्थान पर रखना चाहिए।
  • आवास का तापमान 25-27 डिग्री के बीच होना चाहिए।
  • पशुओं के बीच पर्याप्त दूरी होनी चाहिए।
  • चरनी पशुओं से उचित दूरी पर होनी चाहिए।
  • आवास की ऊंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • पशुओं के आवास की प्रतिदिन सफाई करनी चाहिए।

अगर कोई डेयरी फार्म खोलना चाहता है, तो वह कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखकर इस बिजनेस में सफलता हासिल कर सकता है। इस व्यवसाय में स्थान एक महत्वपूर्ण कारक है।

इसके अलावा जानवरों के रहने की जगह की संरचना और उसका उचित रखरखाव भी बहुत मायने रखता है। डेयरी फार्म खोलने में सरकार भी पूरी मदद करती है।

आप राष्ट्रीय पशुधन मिशन और नाबार्ड की डेयरी विकास योजना के तहत सरकारी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। आप नजदीकी बैंक, पशु अधिकारी या नाबार्ड कार्यालय में अधिक जानकारी ले सकते है।

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