‘किसान चाची’ ने कैसे खड़ा किया अचार का बिजनेस, जानिए पूरी सक्सेस स्टोरी

Kisan Chachi Success Story | समाज में जहां एक ओर महिलाओं को घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है, वहीं दूसरी ओर पद्मश्री चाची के नाम से मशहूर बिहार की इस महिला ने खुद का नाम रोशन किया है, साथ ही अन्य महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का प्रशिक्षण दिया है और खुद के हिंमत पे खड़े होने के लिए प्रोत्साहित किया।

आज के लेख में हम आपको एक महिला की मेहनत की कहानी बताने जा रहे हैं। जिन्होंने अपनी मेहनत से समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। आज के इस लेख में हम आपको उनकी कहानी विस्तार से बताने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं।

समाज की कुत्सित सोच को धता बताकर और परंपराओं की बेड़ियों को तोड़कर ही महिलाओं ने दुनिया की सभी महिलाओं को सशक्त और मजबूत किया है। ऐसी कई महिलाओं के उदाहरण हमारे बीच मौजूद हैं।

दरअसल, यह कहानी है बिहार की रहने वाली पद्मश्री राजकुमारी देवी की। देश में लोग उन्हें ‘किसान चाची’ के नाम से जानते हैं, वह अब 66 साल की हो चुकी हैं, लेकिन काम के प्रति उनका जुनून अब पहले जैसा ही है।

वह मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड के आनंदपुर गांव की रहने वाली हैं, उन्होंने अपनी मेहनत से अचार का व्यवसाय खड़ा किया है।

वह अपने काम की वजह से कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। इसके अलावा उन्हें कई अवॉर्ड भी मिल चुके हैं, लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे 18 साल की कड़ी मेहनत है।

उनका संघर्ष 1990 में शुरू हुआ

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राजकुमारी देवी कहती हैं कि उनका संघर्ष 1990 के दशक में शुरू हुआ था। उनका कहना है कि शादी के 10 साल तक बच्चे नहीं होने पर लोग हमें ताने मारते थे, लेकिन जब हमारे बच्चे हुए तो परिवार में फूट पड़ गई।

जिससे आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। उस समय एक कहावत थी, ‘ खेती करें तरकारी वरना, नौकरी करें सरकारी’ इसलिए सब्जी उगाकर बेचने का फैसला किया, जिसमें पति का भी साथ रहता था।

ऐसे शुरू हुआ अचार का कारोबार

राजकुमारी देवी उर्फ ​​’किसान चाची’ कहती हैं कि शुरुआत में जब हम सब्जियां उगाते थे तो प्रखंड स्तर पर सब्जियों की प्रदर्शनी लगती थी, जिसमें हम कई बार भाग लेते थे और कई बार पुरस्कार पाते थे। ऐसा करने से उन्हें प्रसिद्धि मिलने लगी, इसके बाद वह कृषि विज्ञान केंद्र की सदस्य बनीं।

हमने फलों की भी खेती की और उसमें भी प्रदर्शनी मेलों में कई पुरस्कार जीते। वह बताती हैं कि वर्ष 2002 में वह खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण के लिए विज्ञान केंद्र गईं, जहां उन्होंने तरह-तरह के अचार, मुरब्बा आदि बनाना सीखा।

इसके बाद उन्होंने अचार बनाना शुरू किया, लेकिन अचार बनाने के बाद दिक्कत होने लगी. उन्हें बाजार तक पहुंचाने में। आती थी, जिसके लिए उसने साइकिल चलाना सीखा और खुद जाकर अचार बेचा।

खेती की ट्रेनिंग भी देती थी

किसान की मौसी बताती हैं कि वह जैविक खेती करता था, साथ ही कई प्रदर्शनी कार्यक्रमों में भी जाता था, जिसके चलते अन्य गांवों के लोगों ने उसे महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए कहा।

उसके बाद 10 महिलाओं का समूह बनाकर उन्हें काम सिखाने लगे और कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण भी दिलवाया।

महिलाओं को बकरी पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन आदि कई तरह के काम सिखाए। प्रशिक्षण लेने के बाद इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ।

परिवार ने काम में कितना साथ दिया

वह कहती हैं कि शुरुआती दिनों में पति और बेटे दोनों ने उनका साथ नहीं दिया, लेकिन किसी की नहीं सुनी, वह अपना काम करती रहीं। शुरुआती दिनों में लोग उन्हें ताने मारते थे, लेकिन बाद में धीरे-धीरे घर के लोग उनका साथ देने लगे।

किसान चाची पद्मश्री से सम्मानित 

राजकुमारी देवी के काम की हर कोई सराहना करता है, साथ ही विभिन्न राज्य सरकारों ने उन्हें अब तक कई पुरस्कारों से सम्मानित किया है। उनका कहना है कि वर्ष 2003 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय कृषि मेले में पुरस्कार मिला था।

उसके बाद उन्हें कई कृषि मंत्री पुरस्कार मिल चुके हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें गुजरात में एक पुरस्कार भी दिया है। साल 2019 में 11 मार्च को उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा गया।

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