Khatauni Updated Immediately : अब किसानों के साथ नहीं होगा धोखा, तत्काल अपडेट होगी खतौनी

Khatauni Updated Immediately : उत्तर प्रदेश में जमीन की बिक्री में किसानों के साथ कोई धोखा नहीं होगा। राजस्व परिषद द्वारा एक नई पहल के तहत ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है।

जिससे जमीन की खतौनी को रियल टाइम में अपडेट किया जा सकेगा. फिलहाल इसके लिए प्रदेश की पांच तहसीलों में प्रशिक्षण चल रहा है।

बता दें कि खतौनी को अब हर 6 साल में अपडेट करने की जरूरत होती है। लेकिन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र राजस्व परिषद खतौनी को रियल टाइम में अपडेट करने की प्रक्रिया में लगा हुआ है।

जमीनों के मालिकाना हक को लेकर विवाद, दबंगों द्वारा किसानों की जमीनों पर कब्जा आदि जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है।

हालांकि, फिलहाल इसे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर सदर, सीतापुर के महोली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है।

बाराबंकी की सिरौली, गौसपुर, लखनऊ की मोहनलालगंज और शामली की सदर तहसील। उत्तर प्रदेश की पांच तहसीलों में चल रहा प्रशिक्षण सफल रहा तो पूरे प्रदेश में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।

खतौनी क्या है?

बता दें कि खतौनी को एक प्रकार का भू-अभिलेख या कानूनी दस्तावेज माना जा सकता है, जिसमें किसी भी भूमि का विवरण होता है। अब खतौनी में 12 स्तंभ हो गए हैं।

जब जमीन किसी को बेच दी जाती है, या जमीन के मालिक की मृत्यु हो जाती है, तो यह जमीन उसके खरीदार या वारिस को हस्तांतरित कर दी जाती है। ये सभी विवरण खतौनी के 7वें से 12वें कॉलम में दर्ज हैं।

वर्तमान में खतौनी में कॉलम 7 से 12 में दर्ज खाताधारकों के नाम प्रत्येक नामांतरण आदेश को पढ़कर खोजा जाता है। ऐसे में काफी परेशानी होती है।

उत्तर प्रदेश के लगभग 1.08 राजस्व ग्रामों में प्रतिवर्ष 18 हजार ग्रामों में खतौनी पुनरीक्षण कार्य किया जाता है। इसके लिए अभियान चलाया जाता है। यानी हर गांव में हर 6 साल में रिवीजन का काम होता है।

वर्तमान में खतौनी के कॉलम में नामांकन आदेश में दर्ज खाताधारकों के नाम वहां से हटाकर मूल खाताधारक का नाम दर्शाते हुए कॉलम-2 में दर्ज किए जाते हैं।

लेकिन नया साफ्टवेयर विकसित होने के बाद भूमि विलेख या विरासत की रजिस्ट्री होने पर खतौनी में नामांकन आदेश फीड होते ही नये खाताधारक का नाम स्वत: कॉलम-2 में आ जायेगा।

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इससे नाम अपडेट करने का झंझट खत्म हो जाएगा। नए सॉफ्टवेयर से यह भी पता चल सकेगा कि राज्य में किसी व्यक्ति की जमीन कहां है।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में आए दिन जमीनों के मालिकाना हक को लेकर बड़े-बड़े विवाद सामने आते रहते हैं, दबंगों द्वारा किसानों की जमीन हड़पने के मामले भी आए दिन देखने को मिलते रहते हैं।

हर साल होने वाले खतौनी पुनरीक्षण में कई बार किसान जानकारी नहीं दे पाता है ऐसे में उसकी जमीन पर कब्जा होने का खतरा बना रहता है। लेकिन अब किसान जब चाहे खतौनी को अपडेट कर सकेंगे।

किसानों को क्या फायदा होगा

  • जमीनों की धोखाधड़ी में कमी आएगी।
  • जमीन खरीदने के इच्छुक किसान जान सकेंगे कि इसका असली मालिक कौन है।
  • इससे बेमतलब के विवाद नहीं होंगे।

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