Side Effects of Pesticides | दवा नहीं जहर हैं कीटनाशक, इस रंग के कीटनाशक ज्यादा घातक

Side Effects of Pesticides | आज हमारी जिंदगी के साथ साथ खेती के तरीके और तकनीक भी बदल गए हैं। कम समय में अधिक लाभ कमाने की चाह में किसान तरह-तरह के रासायनिक खादों का प्रयोग करते हैं।

फसलों को कीटों, खरपतवारों और बीमारियों (Pests, Weeds and Diseases) से बचाने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है।

ये रासायनिक कीटनाशक (Chemical Pesticides) फसलों को कुछ समय के लिए कीटों से बचाते भी हैं, लेकिन खेत की जमीन को हमेशा के लिए खराब कर देते हैं।

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यही कारण है कि किसान अब जैविक कीटनाशकों (Organic Pesticides) और उर्वरकों (Fertilizers) की ओर रुख कर रहे हैं। आज इस लेख में हम आपको कीटनाशकों के प्रयोग से होने वाले नकारात्मक प्रभावों के बारे में जानकारी देंगे।

रासायनिक कीटनाशक विभिन्न प्रकार के रसायनों से बने होते हैं। जिनका फसलों की उत्पादकता, भूमि की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य (Productivity of crops, Fertility of Land, Human Health) पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी जहरीली हो जाती है।

जमीन के अंदर सूक्ष्म जीव मौजूद होते हैं, जो मिट्टी को नरम और उपजाऊ बनाए रखते हैं, लेकिन कीटनाशकों के खतरनाक रसायन मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को भी मार देते हैं, जिससे सूक्ष्म जीवों की संख्या बहुत कम रह जाती है, परिणामस्वरूप मिट्टी सख्त हो जाती है। है।

कीटनाशकों के प्रयोग के बाद फसलों में अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों को सामान्य सिंचाई से 3-4 गुना अधिक पानी देना पड़ता है।

कीटनाशकों के प्रयोग का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह होता है कि भूमि बंजर हो जाती है। अगर किसान खतरनाक रसायनों से युक्त कीटनाशकों का साल-दर-साल इस्तेमाल करते हैं तो जमीन की उत्पादक क्षमता एकदम से कम हो जाती है।

कीटनाशकों के प्रयोग से पौधों की रोगों से लड़ने की क्षमता नष्ट हो जाती है। हर साल नए कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है, जिसके आगे कीटनाशक दवाईयां भी ज्यादा असर नहीं दिखा पाती हैं।

कीटनाशकों में मौजूद कैडमियम, आर्सेनिक जैसे तत्व भूमिगत जल और बाहरी जल को प्रदूषित करते हैं।

कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण में भारी असंतुलन पैदा हो रहा है।

कीटनाशकों का बड़ा दुष्परिणाम यह है कि अगर इनका छिड़काव करते समय सावधानी नहीं बरती गई तो किसान की जान भी जा सकती है।

कीटनाशक की थोड़ी मात्रा भी शरीर पर लग जाए तो त्वचा पर दाने और फफोले पड़ जाते हैं। कीटनाशक सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और घातक प्रभाव डालता है।

कीटनाशकों का जहर मिट्टी से पौधों तक जाता है, जिससे अनाज, फल, सब्जियां और अन्य उत्पाद जहरीले हो जाते हैं। जिसे खाने से इंसान की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

कौन सा कीटनाशक है सबसे खतरनाक, ऐसे करें पहचान

आज के समय में बिना कीटनाशकों के प्रयोग के खेती करना भी संभव नहीं है और हर कीटनाशक इतना हानिकारक भी नहीं होता।

कीटनाशक कितना खतरनाक है, इसकी पहचान करने के लिए कीटनाशकों की बोतल और पैकेट पर अलग-अलग रंग और त्रिकोणीय निशान छपे होते हैं।

जैसे लाल रंग का कीटनाशक सबसे तेज जहर होता है। अगर कीटनाशक की बोतल पर लाल निशान छपा है तो इसका मतलब है कि यह सबसे खतरनाक कीटनाशक है। इसकी बहुत कम मात्रा का उपयोग फसलों पर किया जाता है।

पीले निशान वाले कीटनाशक कीटनाशकों की दूसरी सबसे खतरनाक श्रेणी है, इन्हें पैकेट पर लिखी विधि और मात्रा के अनुसार तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही प्रयोग करना चाहिए।

लाल, पीले रंग के कीटनाशकों की तुलना में नीले रंग के कीटनाशक कम खतरनाक होते हैं। ये मध्यम रासायनिक कीटनाशक हैं।

हरे निशान वाले कीटनाशक सबसे कम खतरनाक होते हैं। लेकिन फिर भी इनका उपयोग कृषि विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही करना चाहिए।

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